गोरखपुर। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 30 जनवरी 2026 की रात को होने वाली इस खगोलीय घटना के दौरान बृहस्पति ग्रह और चंद्रमा पास दिखेंगे इस प्रकार के संयोजन को युति या कंजंक्शन कहा जाता है, उन्होंने इस खगोलीय घटना की जानकारी देते हुए बताया कि “कंजंक्शन” (Conjunction) और “निकटतम बिंदु” (Apparent Closest Approach) के समय में सूक्ष्म तकनीकी अंतर है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार इनका विवरण कुछ इस प्रकार से होता है कि खगोल विज्ञान में ‘कंजंक्शन’ तब होता है जब दो पिंडों का (सम्यक आरोहण) Right Ascension (R.A.) लगभग समान हो जाता है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि ‘कंजंक्शन’ बनाम ‘अप्पल्स’ (Appulse) क्या होता है।उन्होंने बताया कि यद्यपि तकनीकी युति 30 जनवरी की रात 11:54 बजे है, लेकिन दोनों पिंडों के बीच की न्यूनतम कोणीय दूरी (Minimum Angular Separation) जिसे ‘Appulse’ कहा जाता है, वह कुछ मिनटों के अंतर पर होगी, इस न्यूनतम दूरी का समय 31 जनवरी 2026 है जोकि लगभग 12:08 AM (IST) पर होगा, और इस समय दोनों के बीच की कोणीय दूरी (3 डिग्री 18 आर्क-मिनट) होगी,लेकिन अवलोकन हेतु भारत के लिए 30 जनवरी की पूरी रात यह घटना घटित होने वाली है।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जाती हुई जनवरी खगोल प्रेमियों को एक और शानदार खगोलीय घटना का आकर्षक नज़ारा देकर जा रही है, इस दौरान 30 जनवरी 2026 की रात्रि में एक और खास खगोलीय घटना होने वाली है। इस रात को चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह आस पास दिखेंगे, या यूं कहें कि दोनों खगोलीय पिंड एक-दूसरे के काफी निकट नजर आएंगे। ऐसे में इस रात आकाश में एक आकर्षक खगोलीय दृश्य नजर आयेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ख़ास बात यह होगी कि यह खगोलीय घटना मिथुन तारामंडल की पृष्ठभूमि में घटित होगी और इस दौरान दूरबीन से देखने पर बृहस्पति के चार प्रमुख चंद्रमा भी स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

लेकिन अगर आपके पास छोटी दूरबीन या बिनाकुलर भी नहीं है, तो भी निराश न हों क्योंकि इस खगोलीय घटना को आप अपनी साधारण आंखों से भी देशभर में आसानी से देखा जा सकेगा। रात्रि में चंद्रमा और बृहस्पति की युति आसानी से देखी जा सकेगी। इस दौरान चंद्रमा वैक्सिंग गिबस अवस्था में रहेगा जोकि लगभग 93 प्रतिशत प्रकाशित होगा। चंद्रमा की दृष्टिगत चमक (मैग्नीट्यूड) करीब माइनस 12.7 रहेगी, जबकि बृहस्पति ग्रह माइनस 2.47 मैग्नीट्यूड पर चमकता दिखाई देगा। सूर्यास्त के बाद यह युग्म पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देना शुरू करेगा। 30 जनवरी की रात करीब 2:30 से 3:00 बजे दोनों खगोलीय पिंड आकाश में काफ़ी पास दिखाई देंगे यह समय अवलोकन के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा। इस दौरान वायुमंडलीय विक्षोभ न्यूनतम होता है और दृश्यता भी अधिक स्पष्ट रहती है।

लेकिन भारत में मौसम साफ़ होने पर इसको पूरी रात देखा जा सकेगा।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय घटना का पीक 30 जनवरी की रात 2:30 से 3:00 बजे के बीच रहेगा। लेकिन 31 जनवरी की रात्रि तक चंद्रमा, बृहस्पति से कुछ आगे निकल जाएगा। इसलिए 30 जनवरी की रात ही इस दृश्य के अवलोकन का सही समय होगा। हालांकि 31 जनवरी की रात्रि में भी यह युग्म कुछ दूरी पर रहते हुए आकाश में दिखाई देगा।क्या होता है कंजंक्शन।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश में जब दो खगोलीय पिंड, एक ही दिशा में लगभग साथ दिखें, उसे युति कहते हैं। जब दो आकाशीय पिंडों का सम्यक आरोहण (राइट एसेन्शन) लगभग समान हो जाता है, तो इस स्थिति को खगोल विज्ञान की भाषा में युति या ‘कंजंक्शन’ कहा जाता है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह तकनीकी कंजंक्शन 30 जनवरी की रात में होगा। इस क्षण चंद्रमा और बृहस्पति एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा पर स्थित होंगे। कंजंक्शन, दोनों पिंडों के बीच वास्तविक दृष्टिगत निकटता में अंतर होता है। दोनों के बीच न्यूनतम कोणीय दूरी 31 जनवरी 2026 को तड़के लगभग 12:08 बजे होगी। इस समय चंद्रमा और बृहस्पति के बीच की दूरी लगभग 3 डिग्री 18 आर्क-मिनट रहेगी।

क्योंकि कंजंक्शन और निकटतम बिंदु के समय में सूक्ष्म तकनीकी अंतर है।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है। आप किसी खुले, अंधेरे और साफ स्थान से नंगी आंखों से ही इस खगोलीय दृश्य का आनंद ले सकते हैं। वहीं, दूरबीन से देखने पर बृहस्पति के चारो प्रमुख चंद्रमा आयो , यूरोपा, गेनीमेड और कैलिस्टो एक सीधी रेखा में स्पष्ट दिखाई देंगे। साथ ही प्रकाश प्रदूषण से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।
निःशुल्क, किन्हीं भी ख़ास खगोलीय जानकारियों हेतु संपर्क सूत्र – खगोलविद अमर पाल सिंह, एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर,वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

