पीलीभीत। यूपी के पीलीभीत जिला महिला अस्पताल में नवजात की मौत को लेकर उठे गंभीर सवालों के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर 16 दिन बाद नवजात के शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमॉर्टम कराया गया। यह पूरी प्रक्रिया परिजनों की मौजूदगी में मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों की निगरानी में संपन्न हुई।
सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के मैत्री कॉलोनी निवासी मृदुल सिंह ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि दो दिसंबर की रात करीब 10:30 बजे उनकी पत्नी प्रिया सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल स्टाफ ने उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी। रुपये देने से इनकार करने पर स्टाफ का व्यवहार ठीक नहीं रहा।
परिजनों के अनुसार तीन दिसंबर की सुबह सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन नवजात मृत अवस्था में पैदा हुआ। आरोप है कि नवजात के सिर पर चोट के निशान थे। जब परिजनों ने इस पर सवाल उठाए तो अस्पताल स्टाफ ने उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया और अभद्र व्यवहार किया।
घटना से आहत परिजनों ने उसी दिन नवजात के शव को मुक्तिधाम में दफन कर दिया था। बाद में जिला महिला अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शासन स्तर पर शिकायत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने निष्पक्ष जांच के लिए शव का पोस्टमॉर्टम कराने के आदेश दिए।
शुक्रवार को नायब तहसीलदार पारितोष द्विवेदी, सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी और इंस्पेक्टर सुनगढ़ी नरेश त्यागी की मौजूदगी में पुलिस ने मुक्तिधाम पहुंचकर परिजनों द्वारा बताए गए स्थान से कब्र खोदकर नवजात के शव को बाहर निकलवाया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई और पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही नवजात की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

