गोरखपुर। बाहरी सौर मंडल के चार विशाल गैसीय ग्रहों में अरुण (यूरेनस) एक प्रमुख ग्रह है। वृहस्पति, शनि और नेपच्यून के साथ इसकी गणना सौर मंडल के दानव ग्रहों में होती है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार अरुण ग्रह सूर्य से औसतन 287 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित है, जो पृथ्वी की तुलना में लगभग 19 गुना अधिक दूरी है। इसका व्यास 51,000 किलोमीटर है तथा इसका द्रव्यमान पृथ्वी से करीब 15 गुना अधिक है। इसका वायुमंडल हाइड्रोजन, हीलियम एवं मीथेन से निर्मित होने के कारण यह हल्के हरे रंग का दिखाई देता है। यहां तापमान लगभग -200° सेल्सियस तक रहता है।यूरेनस अपनी धुरी पर सिर्फ 11 घंटे में एक चक्कर लगाता है और पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमता है। यह सूर्य की परिक्रमा लगभग 84 वर्षों में पूरी करता है। ग्रह के अब तक 29 ज्ञात उपग्रह एवं 13 धुंधले छल्ले पाए गए हैं।
क्या होता है अरुण ग्रह का विरोध बिंदु?
खगोलविद के अनुसार, जब पृथ्वी, सूर्य और अरुण ग्रह एक सीधी रेखा में आ जाएं और अरुण ग्रह पृथ्वी के विपरीत दिशा में सूर्य के सामने दिखाई दे, तो इसे विरोध (Opposition) कहा जाता है।इस वर्ष अरुण ग्रह का विरोध बिंदु 21 नवंबर 2025 की रात पड़ेगा।
क्यों कहा जाता है अरुण को लेटा हुआ ग्रह?
यूरेनस का धुरी झुकाव लगभग 98° है, जिसके कारण यह ग्रह करवट लेकर सूर्य की परिक्रमा करता है। इसी विशेषता के कारण इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है। यहां एक-एक ऋतु लगभग 21 वर्ष तक रहती है।सूर्य इस ग्रह पर पश्चिम से उदित होकर पूर्व में अस्त होता है और इसके उपग्रह भी इसी दिशा में दिखाई देते हैं, जिससे यह अन्य ग्रहों की तुलना में अत्यंत अनोखा है।
आकाश में कहाँ और कैसे दिखाई देगा यूरेनस?
विरोध बिंदु के दौरान अरुण ग्रह का मैग्निट्यूड लगभग +5.6 रहेगा, जो नग्न आँख से देखना बेहद कठिन बनाता है। इसे देखने के लिए दूरबीन या बाइनॉक्यूलर की सहायता आवश्यक होगी।यह वृषभ नक्षत्र में रहेगा और कृत्तिका (प्लीएड्स) नक्षत्र से लगभग 4–4.5° दक्षिण में दिखाई देगा।रात में यह पूर्व-दक्षिण-पूर्व से उदित होकर मध्यरात्रि में दक्षिण दिशा में सबसे ऊँचाई पर होगा और सुबह पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा।रोहिणी तारा (अल्डेबेरन) के निकट होने से ग्रह की पहचान करना आसान रहेगा।
देखने का सर्वोत्तम समयविरोध की रात पूरी रात अरुण दिखाई देगा, लेकिन सबसे उत्तम समय मध्यरात्रि के आसपास रहेगा, जब यह आकाश में सबसे ऊँचा होगा। इसे देखने के लिए साफ, अंधेरा और प्रकाश प्रदूषण रहित आकाश आवश्यक है।

