आस्था डेस्क। बिहार के गया जिले में स्थित प्रेतशिला हिंदू धर्म के प्रमुख पितृ तीर्थों में गिना जाता है। गया जी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान पिंडदान और पितृ तर्पण की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि प्रेतशिला में विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण करने से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।प्राचीन धार्मिक मान्यताओं में प्रेतशिला का उल्लेख ‘प्रेतशिला तीर्थ’ के रूप में मिलता है। यहां स्थित प्रेतशिला पहाड़ी धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी से आसपास के क्षेत्र का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।प्रेतशिला पर्वत पर भगवान यमराज से जुड़ा मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि गया क्षेत्र में किए जाने वाले ये कर्म पूर्वजों के उद्धार और उनकी आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण हैं।प्रेतशिला की पहचान केवल धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं है। यहां सदियों से चली आ रही पूजा-पद्धतियां, लोक परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं इस स्थान की सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध बनाती हैं। पितृपक्ष मेले के दौरान यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।**यात्रा का बेहतर समय**प्रेतशिला की यात्रा के लिए सितंबर से अप्रैल तक का समय सामान्यतः सुविधाजनक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान धार्मिक गतिविधियां विशेष रूप से बढ़ जाती हैं।**मोबाइल और कैमरे की सुविधा**प्रेतशिला में सामान्य रूप से मोबाइल फोन, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने की अनुमति रहती है। हालांकि मंदिर या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्थानीय नियमों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
प्रेतशिला: पितरों के मोक्ष की आस्था से जुड़ा गया का पवित्र तीर्थ, पिंडदान के लिए देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

