लखनऊ। गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की अपनी उम्मीदें कब पूरी होंगी, यह सवाल आज भी बना हुआ है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर नवजात शिशुओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने तक आशा कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करती हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी मेहनत के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं मिलने का इंतजार है।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाने में उनका पूरा समय निकल जाता है। गांवों में घर-घर जाकर सर्वे करना, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना, प्रसव के बाद मां और बच्चे की देखभाल तथा टीकाकरण अभियान में सहयोग करना उनकी नियमित जिम्मेदारियों में शामिल है। इसके अलावा समय-समय पर विभाग की ओर से नए कार्य भी सौंपे जाते हैं।कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में निश्चित मासिक मानदेय, प्रोत्साहन राशि का समय से भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रोत्साहन राशि के भुगतान में देरी भी परेशानी बढ़ाती है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान कब होगा? सरकार और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को सफल बनाने में अहम योगदान देने वाली इन महिलाओं को आखिर कब उनके काम का उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी?अब आशा कार्यकर्ताओं की निगाहें सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगों पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय भी लिया जाएगा।

