अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में सोमवार को आयोजित भव्य ध्वजारोहण समारोह में एक भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब मुख्य मंच के सामने की कतार में बैठे साधु-संत भी श्रद्धा से अभिभूत होते हुए अपने आँसू पोंछते नजर आए। इस ऐतिहासिक अवसर के लिए देश और विदेश से लगभग आठ हजार श्रद्धालुओं व विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया था।

निर्धारित शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वज आरोहित किया। जैसे ही केसरिया ध्वज हवा में लहराया, पूरा परिसर “जय श्री राम” के जयघोष से गूँज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। ध्वजारोहण से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विस्तृत पूजन-अर्चन और यज्ञ अनुष्ठान संपन्न हुआ। यज्ञकुंडों से उठती आहुति की सुगंध, नगाड़ों की धुन और घंटियों की अनुगूँज ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
प्रधानमंत्री द्वारा ध्वज फहराते ही उन्होंने देश को सनातन परंपराओं की निरंतरता, आस्था की शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया। समारोह में देशभर से आए संत-महंत, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियाँ और हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सुरक्षा के व्यापक इंतज़ामों के बीच अयोध्या का संपूर्ण क्षेत्र—मंदिर परिसर से लेकर सरयू तट तक—दीपों, पुष्प सज्जा और रंगोलियों से जगमगा उठा।

करीब चार से पाँच मिनट के ध्वजारोहण अनुष्ठान को लगभग सात हजार से अधिक लोगों ने साक्षात देखा। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक धर्मगुरु तथा दलित, वंचित, किन्नर और अघोरी समुदायों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

