अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 11 सालों में महिला, दलित, पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान और युवाओं को विकास के केंद्र में रखा गया है। रामलला प्राण प्रतिष्ठा के समय भी हमने ‘राम से राष्ट्र’ की बात कही थी, क्योंकि लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की नींव को एक हजार वर्ष तक मजबूत बनाना है। जो केवल वर्तमान के बारे में सोचते हैं, वे भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। देश तब भी था जब हम नहीं थे, और जब हम नहीं रहेंगे तब भी रहेगा — इसलिए दूरदृष्टि जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लगभग 190 साल पहले, 1835 में लार्ड मैकाले ने मानसिक गुलामी की सोच थोपी थी। आने वाले दस वर्षों में, 2035 तक, इस गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होना होगा। आज भी यह मानसिकता कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए हुए है। नौसेना के ध्वज से गुलामी के प्रतीक को हटाना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यही गुलामी की मानसिकता थी, जिसने भगवान राम तक को काल्पनिक बताने का प्रयास किया, जबकि भारत की मिट्टी के कण-कण में राम बसते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की अयोध्या विकसित भारत की मेरुदंड बनने जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु के एक गांव में मिले प्राचीन शिलालेख बताते हैं कि भारत में शासन और चुनाव प्रणाली कितनी विकसित थी, लेकिन मानसिक गुलामी के कारण पीढ़ियों को इससे वंचित रखा गया।
उन्होंने कहा कि नौसेना के ध्वज पर ऐसे प्रतीक थे जिनका भारतीय विरासत से कोई संबंध नहीं था। हमने उन प्रतीकों को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को सम्मान दिया। यह केवल डिजाइन बदलने का निर्णय नहीं था, बल्कि मानसिकता बदलने का क्षण था। भारत अब स्वयं की शक्ति और अपने मूल्यों से परिभाषित होगा, किसी और की विरासत से नहीं। यही परिवर्तन आज अयोध्या की धरती पर दिखाई दे रहा है।

